परंतु अंतरवासना की आवाज़ को दबाना आसान नहीं था। एक शाम, जब सभी थक कर सो रहे थे, राजू ने अपने कमरे की अलमारी में रखी पुरानी बाँसुरी उठाई। वह धीरे‑धीरे हवा में डालकर एक छोटा‑सा स्वर निकालने लगा। ध्वनि, जैसे नदी की धारा, धीरे‑धीरे घर के हर कोने में फैल गई।
इस लेख में, हम अंतरवासना के बारे में एक नए दृष्टिकोण से चर्चा करेंगे, और आपको बताएंगे कि क्यों यह हमारे जीवन में इतना महत्वपूर्ण है। antarvasna hindi story new